प्लास्टिक-मुक्त अयोध्या: पवित्र धरोहर का संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की ओर एक अटूट कदम

श्री राम जन्मभूमि अयोध्या धाम केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि हमारी प्राचीन सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर का प्रतीक भी है। प्रतिदिन लाखों की संख्या में देश-विदेश से आ रहे श्रद्धालुओं के आगमन के साथ, शहर को स्वच्छ, पवित्र और प्रदूषण-मुक्त बनाए रखना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी बन गया है।

इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए हेल्प सेफ्टी एंड केयर फाउंडेशन (Help Safety and Care Foundation) ने "प्लास्टिक-मुक्त अयोध्या अभियान" की शुरुआत की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अयोध्या धाम को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक (एक बार उपयोग होने वाले प्लास्टिक) से पूरी तरह मुक्त बनाना और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देना है।

अभियान की मुख्य गतिविधियाँ और जमीनी प्रयास: पर्यावरण-अनुकूल थैलों का वितरण (Eco-Friendly Bag Distribution)

फाउंडेशन के स्वयंसेवकों द्वारा मंदिर परिसर, प्रमुख मार्गों और सरयू तट के आसपास स्थानीय दुकानदारों, विक्रेता संघों और श्रद्धालुओं को कपड़े और जूट के थैले मुफ़्त में वितरित किए जा रहे हैं।

दुकानदारों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे ग्राहकों को प्लास्टिक की पॉलीथिन देने के बजाय कपड़े के थैलों का उपयोग करने के लिए प्रेरित करें।

सरयू नदी और घाटों की स्वच्छता

पवित्र सरयू नदी के घाटों पर प्लास्टिक कचरे के जमाव को रोकने के लिए विशेष स्वच्छता शिविर लगाए गए हैं।

श्रद्धालुओं को जागरूक किया जा रहा है कि वे पूजा सामग्री, फूल और अन्य वस्तुएं प्लास्टिक बैग में रखकर नदी में न बहाएं।

स्थानीय व्यापारियों और समुदाय का जुड़ाव

बाज़ार क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटक, संवाद सत्र और पोस्टर अभियानों के माध्यम से प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है।

स्थानीय वेंडरों को रिसाइकिल योग्य और बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

हमारा संकल्प और अपील प्लास्टिक प्रदूषण न केवल हमारी नदियों और मिट्टी को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि अयोध्या की पवित्रता पर भी प्रभाव डालता है। हेल्प सेफ्टी एंड केयर फाउंडेशन का यह दृढ़ विश्वास है कि जन-भागीदारी (Community Participation) के बिना कोई भी बदलाव संभव नहीं है।

हम सभी श्रद्धालुओं और अयोध्या वासियों से अपील करते हैं:

अपनी यात्रा के दौरान हमेशा कपड़े का थैला साथ रखें।

प्लास्टिक की बोतलों और डिस्पोजल का उपयोग करने से बचें।

कचरा केवल निर्धारित डस्टबिन में ही डालें।

आइए, मिलकर अपनी आस्था के इस पावन धाम को स्वच्छ, हरा-भरा और प्लास्टिक-मुक्त बनाएं!